Rihai

Compiler:- Rashmi Joshi

रिहाई बस एक शब्द ही नहीं है, ये एक ख्वाहिश है जिसे हर रोज कैद में रह रहे लोग महसूस करते हैं ,आसमान में उड़ने की ख्वाहिश वो रोज अपने दिल के किसी कोने में रखते है।

इस रिहाई को तो केवल वो ही समझ पाते है जो हर रोज खुद से और दूसरो से अपनी रिहाई की उम्मीदें करते हैं। पिंजरे में कैद चिड़िया जैसे रोज आसमान में उड़ने का ख्वाब रखती है वैसे ही बंद दरवाजे से रोज बाहर झांकने वाला मनुष्य भी अपनी रिहाई के सपने देखता है।

 

यहां हमारे लेखक और लेखिकाओं ने अपने कलम से इस एहसास को लिखने की एक कोशिश की है उम्मीद है आपको हमारे लेखक और लेखिकाओं का ये प्रयास पसंद आयेगा ।

 
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